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23 Feb 2012 (Thu)
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केन्द्र सरकार ने भारत के ६,००,००० गांवों में १,००,००० सामान्य सेवा केन्द्र स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करने हेतु सामान्य सेवा केन्द्र की परियोजना को अनुमोदन प्रदान किया है । यह योजना समेकित रूप से भारत की ग्रामीण जनता को सरकार, निजि एवं सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख सेवाओं के लिए शुरू से अन्त तक डिलीवरी प्रदान करने के लिए सामान्य सेवा केन्द्र स्थापित करेगी । इसका उद्देश्य एक ऐसा प्लेटफार्म विकसित करना है जो सूचना आधारित तथा गैर-सूचना आधारित सेवाओं के संयोजन से देश के दूरवर्ती क्षेत्रों में ग्रामीणों के लाभ के लिए सामाजिक एवं व्यवसायिक लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए सरकार, निजी तथा सामाजिक क्षेत्र के संगठनों को समर्थ बना सके । उत्तराखण्ड राज्य में २८०४ सी०एस०सी की स्थापना की जानी है । ये केन्द्र प्रदेश में ''उत्तरा'' के नाम से जाने जायेगें ।
सी०एस०सी० केन्द्र पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तैयार किये जा रहे हैं जिनके लिए राज्य को ०३ यूनिट में विभक्त किया गया है तथा प्रत्येक यूनिट के लिए खुली निविदा प्रणाली के आधार पर सर्विस सेन्टर एजेंसी (एस०सी०ए०) का चयन किया गया है । सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेन्सी (आई०टी०डी०ए०), उत्तराखण्ड को स्टेट डेजिग्नेटेड एजेन्सी (SDA) नामित किया गया है। इस हेतु SDA व SCA के मध्य मास्टर सर्विस एग्रीमेण्ट हस्ताक्षरित किये जा चुके हैं ।
दो यूनिटों के लिए मै० रिलाइन्स इन्फोकॉम एस०सी०ए० है तथा एक यूनिट के लिए मै० कॉमेट टैक्नोलॉजी प्रा० लि० एस०सी०ए० था। मै० कॉमेट टैक्नोलॉजी प्रा० लि० ने स्वयं को परियोजना से अलग कर लिया है ।
सामान्य सेवा केन्द्रों को आई०सी०टी० समर्थित कियोस्क के रूप में डिजाइन किया जायेगा । इसमें कम्प्यूटर तथा मूलभूत सहयोगी उपकरण जैसे प्रिंटर, स्कैनर, यू०पी०एस० वायरलैस आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी ।
राज्य में सर्विस सेन्टर ऐजेन्सी द्वारा ग्रामीण स्तरीय उद्यमियों का चयन किया जाएगा, जिनके द्वारा यह केन्द्र स्थापित किये जाएंगे। ग्राम स्तर के ये उद्यमी विलेज लेविल इण्टरप्रिन्योर (वी०एल०ई०) कहलायेंगे। इस योजना से ग्रामीण अंचल के जनमानस को तो लाभ प्राप्त होगा साथ ही ग्रामीण युवकों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे तथा वी०एल०ई० के रूप में उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
इन केन्द्रों के माध्यम से विभिन्न प्रस्तावित शासकीय सेवाओं (जी२सी) यथा सरकारी प्रमाण पत्र (जन्म, मृत्यु, जाति निवास आदि) भूमि अभिलेखों का विवरण, रोजगार पंजीकरण, वाहन पंजीकरण, पेंशन योजना, उपयोगिता बिल, विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं फार्म की उपलब्धता आदि के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की प्रस्तावित वाणिज्यिक सेवायें (बी२सी) भी जनमानस को उपलब्ध कराई जायेंगी यथा स्कैनिंग एवं प्रिंटिंग, डिजीटल फोटोग्राफी, फोटो प्रिंटिंग, इन्टरनेट सुविधा, डी.टी.पी, परीक्षा परिणाम, रेल आरक्षण एवं ऑनलाइन जॉब सेवायें आदि । इन केंन्द्रों द्वारा जो सुविधायें जनमानस को उपलब्ध कराई जायेंगी उसके लिए शुल्क भी लिया जाना प्रस्तावित है । ये केन्द्र सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार तकनीकी के सहयोग से ग्रामीण स्तर पर व्यापार की सम्भावनाओं को स्वत्रंत रूप से विकसित करेंगे यह योजना केन्द्र और राज्य सरकार के मध्य ५०:५० अनुपात में वित्त पोषित है । मै० आई०एल०एण्ड एफ०एस परियोजना के लिए राष्ट्र स्तरीय सेवा एजेन्सी के रूप में नामित किया गया था जिसका कार्यकाल जून २०१० में समाप्त हो चुका है
मैसर्स रिलाइन्स लिमिटेड से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर लगभग 2329 सेन्टरों की स्थापना की गई है । सूचना प्रौघोगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा सी0एस0सी0 के माध्यतम से सर्विस डिलिवरी हेतु नागरिकों की अवेयरनेस हेतु सेमीनार/वर्कशाप कन्डभक्ट करने हेतु कहा गया है। दिनॉक 16 जुलाई 2011 को इसी क्रम में नागरिकों के अवेयनेस हेतु दिल्ली में एक वर्कशाप का आयोजन किया गया था । 670 न्या य पंचायतों में अटल ई सेवा केन्द्रों की स्थाीपना संबंधी कार्यवाही प्रगित पर है।